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नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से बाढ़, 350 से अधिक मृत

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने से अचानक आई बाढ़ में 350 से अधिक लोग मारे गए हैं और 1,000 से अधिक लापता हैं। बचाव दल कीचड़ और मलबे में तलाश जारी रखे हुए है। बुधवार सुबह आई इस बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में घरों, सड़कों, पुलों और बिजली संयंत्रों को बहा दिया।

क्या हुआ

ग्लेशियर की एक बड़ी चट्टान टूटकर ल्हेंदे खोला नदी में गिरी, जो चीन और नेपाल के बीच बहने वाली भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। इससे बर्फ और मलबे का एक प्राकृतिक बांध बन गया, जो जल्द ही टूट गया और घाटी में पानी, कीचड़ और चट्टानों की लहर दौड़ गई। काठमांडू के विशेषज्ञों के अनुसार, त्रिशूली नदी का जलस्तर आधे घंटे में 9 मीटर तक बढ़ गया। यह घटना 5.2 तीव्रता के भूकंप जितनी शक्तिशाली थी।

बचाव प्रयास और बैरियर झीलें

बचावकर्मी रसुवा जिले में मलबे और कीचड़ में खुदाई कर रहे हैं, जहां सबसे अधिक नुकसान हुआ है। कैलाश मानसरोवर मार्ग पर जा रहे सैकड़ों भारतीय तीर्थयात्री लापता हैं। नेपाल की ओर मलबे का बांध टूटने के बाद हेलीकॉप्टर उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं। चीनी पक्ष ग्यिरोंग के पास एक झील पर नज़र रख रहा है, जिसमें 2.5 मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक पानी है। अधिकारियों ने कहा कि झील के टूटने का खतरा अधिक है, लेकिन यह प्राकृतिक रूप से सूख रही है।

बढ़ता खतरा

वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते तापमान से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र अस्थिर हो रहे हैं। हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे हैं और इस तरह की अचानक टूटने की घटनाएं अधिक संभावित होती जा रही हैं। यह आपदा संकरी पहाड़ी घाटियों में रहने वाले समुदायों के लिए बढ़ते खतरे की याद दिलाती है।

स्रोत: The Guardian