सुरंगें बनीं मौत का जाल
पिछले सप्ताह नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ से मौत का आंकड़ा 1,000 से अधिक हो गया है, और बचाव दल अभी भी कीचड़ से भरी सुरंगों की खुदाई कर रहा है, जहां 600 से अधिक जलविद्युत श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है। नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि लगभग 3,900 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें से अधिकांश उन गांवों के हैं जो भोटे कोसी नदी घाटी में पानी के बढ़ने से बह गए थे।
परिवारों को इंतजार और उम्मीद
लापता मजदूरों के परिवार सुरंगों के प्रवेश द्वारों के पास डेरा डाले हुए हैं, किसी भी खबर का इंतजार कर रहे हैं। कई मजदूर नदी के किनारे बनी जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत थे, जिनमें रसुवा जिले का चिलिमे संयंत्र भी शामिल है, जो सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। लापता लोगों में से लगभग सातवां हिस्सा ऐसे संयंत्रों में काम करता था।
बचाव प्रयास जारी
अधिकारियों का कहना है कि और अधिक जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना कम होती जा रही है, लेकिन तलाश बंद नहीं हुई है। दोनों देशों में लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं, और सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि दूरदराज के पहाड़ी गांव अभी भी कटे हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि बचाव दल चौबीसों घंटे काम कर रहा है, अब उसका ध्यान पुनर्वास पर होगा।