सीमावर्ती क्षेत्र में बाढ़ का कहर
बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ में लगभग 400 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार सुबह तक 1,300 से अधिक लोग लापता हैं। हिमालयी सीमावर्ती इलाके में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन हुआ, जिससे घर, पुल और सड़कें बह गईं।
ड्रोन फुटेज में तबाही का पैमाना दिखा। नदी घाटियों के किनारे बसे पूरे गाँव मिट्टी और मलबे में दब गए। नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से समुदायों में कीचड़ भरा पानी बह गया।
लापता लोगों में अमेरिकी नागरिक
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने घोषणा की कि 66 अमेरिकी नागरिक लापता हैं, अब तक दो लोगों को बचाया गया है। अमेरिका में परिवार सोशल मीडिया पर अपने प्रियजनों का पता लगाने में मदद मांग रहे हैं। यह क्षेत्र पर्वतारोहियों और साहसिक यात्रियों के लिए लोकप्रिय है।
नेपाल और चीन की बचाव टीमें कठिन परिस्थितियों में काम कर रही हैं। भूस्खलन ने कई सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे बचावकर्मियों को हेलीकॉप्टर से कुछ गाँवों तक पहुँचना पड़ रहा है। खराब मौसम ने उड़ानों को धीमा कर दिया है, और खोज अभियान में हफ्तों लगने की उम्मीद है।
चेतावनी प्रणालियों की समीक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक आई बाढ़ की गति ने क्षेत्र की चेतावनी प्रणालियों को बेकार कर दिया। एक जलविज्ञानी ने कहा, “पानी इतनी तेज़ी से आया कि कोई अलार्म मदद नहीं कर सकता था।” वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि क्या तापमान बढ़ने से हिमालय में ग्लेशियरों और पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से भूस्खलन की संभावना बढ़ी।
चीन की सूचना नियंत्रण के कारण तिब्बत की ओर हुए नुकसान का आकलन करना मुश्किल है। सहायता समूह दोनों सरकारों से डेटा साझा करने का आग्रह कर रहे हैं ताकि आपदा का पूरा पैमाना स्पष्ट हो सके। जीवित बचे लोगों की तलाश जारी है और अंतर्राष्ट्रीय सहायता आनी शुरू हो गई है।